राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: एक अद्वितीय संगठन

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: एक अद्वितीय संगठन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारत का एक प्रमुख स्वयंसेवी संगठन है, जो 1925 में श्री केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित किया गया था। इस संगठन का मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित है। आरएसएस का मूल उद्देश्य “हिंदू राष्ट्र” की स्थापना करना है। यहाँ इस संगठन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई है, जो इसकी महत्वपूर्णता और योगदान को समझने में मदद करेगी।

संगठन का लक्ष्य

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल उद्देश्य है “संघ चले, समाज बदले”।
  • संघ की गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाया जाना संघ का मानना है।
  • भारत को हिंदू राष्ट्र मानकर हिंदू संस्कृति की संरक्षा और बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
  •  संघ का लक्ष्य हिंदू समुदाय को एकजुट करना और उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा करना है।

इतिहास

  • संघ की स्थापना: 1925 में मुंबई में श्री केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
  • उद्देश्य: संघ का उद्देश्य हिंदू समाज में सेवा के लिए एक संगठन बनाना था।
  • स्वयंसेवा का महत्व: संघ के संस्थापकों ने स्वयंसेवा को महत्वपूर्ण बताया और समाज के उत्थान के लिए इसे एक माध्यम के रूप में देखा।
  • संगठन की आवश्यकता: हिंदू समाज के अभ्युदय और संरक्षण के लिए समर्थ और सशक्त संगठन की आवश्यकता को महसूस किया गया था।
  • समाजिक उत्थान: संघ के माध्यम से समाज में सामाजिक उत्थान को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • संघ के उद्देश्यों पर ध्यान: संघ के उद्देश्यों में हिंदू समाज के समृद्धि और संरक्षण को ध्यान में रखा गया है।
  • संगठन का प्रभाव: संघ के गठन से हिंदू समाज में सकारात्मक परिवर्तन आया और सेवा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियाँ हुईं।
  • संघ की भूमिका: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदू समाज के आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • संगठन की गतिविधियाँ: संघ के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सेवाओं की प्रोत्साहनीय प्रक्रिया में काम किया जाता है।
  • योगदान: संघ ने भारतीय समाज के उत्थान और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल प्रस्तुत की है।

संघ की गतिविधियाँ:

  1. शारीरिक प्रशिक्षण: संघ शारीरिक प्रशिक्षण को महत्व देता है और युवाओं को खेल और शारीरिक शक्ति विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके तहत, विभिन्न शिविरों और प्रोग्रामों का आयोजन किया जाता है जो स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं।
  2. सामाजिक सेवा: संघ ने सामाजिक सेवा में भी अहम भूमिका निभाई है। यह विभिन्न समाज सेवा कार्यों में योगदान करता है, जैसे कि वृद्धाश्रमों में सेवा, आपातकालीन स्थितियों में सहायता, और सामाजिक अन्य समस्याओं का समाधान।
  3. धार्मिक शिक्षा: संघ धार्मिक शिक्षा को भी महत्व देता है और हिंदू धर्म के मूल्यों और संस्कृति को बढ़ावा देता है। इसके तहत, विभिन्न धार्मिक संगठनों और मंदिरों के साथ साथ शास्त्रार्थ और साधना के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  4. राजनीतिक गतिविधियाँ: हालांकि संघ एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में जाना जाता है, लेकिन उसकी राजनीतिक गतिविधियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन शामिल है। यह आमतौर पर चुनावी अभियानों में साझा होता है और राजनीतिक प्रशासन को समर्थन प्रदान करता है।

5. शिक्षा: संघ ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान किया है। इसने विद्यालयों और कॉलेजों की स्थापना की है और शिक्षा के स्तर को उच्च करने के लिए अनेक पहल की है।

संघ की यह सभी गतिविधियाँ इसे एक सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक संगठन के रूप में महत्वपूर्ण बनाती हैं, जो हिंदू समाज के उत्थान और समृद्धि के लिए काम करता है।

संघ के प्रमुख नेता

  1. मोहन भागवत (सरसंघचालक):

    • शिक्षा के क्षेत्र में संघ द्वारा चलाए गए अनेक पहलों का समर्थन और प्रोत्साहन।
    • सामाजिक सेवा कार्यों की बढ़ाई और उनके संगठन में नेतृत्व का प्रदर्शन।
  2. सुरेश जोशी (सह-सरसंघचालक):

    • हिंदू धर्म के मूल्यों और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए अभूतपूर्व प्रयास।
    • राजनीतिक संज्ञान को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन।
  3. दत्तात्रेय होसबले (सरकार्यवाह):

    • संघ के अनुसंधान और विश्लेषण के माध्यम से समाज में जागरूकता और संज्ञान को बढ़ावा देना।
    • संघ के संगठनात्मक कार्यों का प्रबंधन और कार्यक्रमों की संचालन में नेतृत्व का उत्तम प्रदर्शन।

संघ के नेतृत्व में कुछ महत्वपूर्ण कार्य:

  • विद्यालयों और कॉलेजों की स्थापना और प्रबंधन।
  • धार्मिक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन।
  • सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विभिन्न पहलों की शुरुआत और संचालन।
  • युवाओं के लिए विभिन्न प्रोग्रामों और कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन।
  • समाज में जागरूकता और समर्थन के लिए विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय अभियानों का समर्थन।

इन नेताओं की नेतृत्व में संघ ने हिंदू समाज के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रमुख संगठन

संघ के संगठनों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), विश्व हिंदू परिषद (विहिप), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), और राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति (आरएसएसएस) शामिल हैं। इन संगठनों के माध्यम से संघ विभिन्न क्षेत्रों में अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए काम करता है।

संघ के आरोप

संघ पर अक्सर सांप्रदायिक हिंसा और मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के आरोप लगते हैं। आरएसएस ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वह एक सामाजिक संगठन है जो समाज के उत्थान और सभी वर्गों की समृद्धि के लिए काम करता है।

 निष्कर्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय समाज के विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके द्वारा संचालित योजनाएं और परियोजनाएं समाज के विभिन्न पहलुओं में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करती हैं। यह संगठन हिंदू समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रेरित करता है और उसे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में सहायक है। आरएसएस अपनी सामाजिक सेवा, शिक्षा, और संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है और भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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