विकासात्मक कार्य (DEVELOPMENT TASKS)

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विकासात्मक कार्य (DEVELOPMENT TASKS)


1972 में रॉबर्ट हेवीघर्स्ट ( Robesrt Havighurst ) ने विकासात्मक कार्यों को परिभाषित करते हुए लिखा कि “प्रत्येक व्यक्ति शैशवास्था से वृद्धावस्था तक विकास की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है, प्रत्येक अवस्था विशिष्ट विकासात्मक कार्यों से सम्पृक्त होती है। विकासात्मक कार्य वह कार्य है जो किसी व्यक्ति के जीवन में निश्चित समय पर क्रमिक रूप से स्थान लेता है। सफलतापूर्ण उपलब्धि होने पर व्यक्ति को आनन्द प्राप्त होता है और भविष्य में सफलता के लिए प्रयास करता है, जबकि असफलता प्राप्त व्यक्ति दुःखी होता है, समाज द्वारा अमान्य हो जाता है और भविष्य के कार्यों में उसे परेशानी उठानी पड़ती है।“

हेवीघर्स्ट ने विकासात्मक कार्यों के निम्नलिखित तीन स्रोत प्रस्तुत किए-


(I) शारीरिक परिपक्वता (Physical maturation) – जैसे-चलना व बोलना सीखना, किशोरावस्था के समय विपरीत लिंग के प्रति व्यवहार आदि ।
(II) व्यक्तिगत स्रोत (Personal source) -जैसे- व्यक्तित्व परिपक्वता से तथा व्यक्तिगत मूल्यों एवं आकांक्षाओं से उत्पन्न कार्य; जैसे-व्यावसायिक कौशल ।
(III) सामाजिक दबाव (Pressure of society) – जैसे- उत्तरदायी नागरिक की भूमिका सीखना।

विकासात्मक कार्यों की अवधारणा को धीरे-धीरे शिक्षण विधियों और शिक्षण शैली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाने लगा है। शैशवास्था, बाल्यावस्था और किशोरावस्था का विस्तृत वर्णन करने से पूर्व हेवीघर्स्ट द्वारा प्रस्तुत इन अवस्थाओं के विकासात्मक कार्यों का उल्लेख करना उचित समझा –


शैशवास्था एवं प्रारम्भिक बाल्यावस्था ( 0 से 5 वर्ष तक) के विकासात्मक कार्य


I. चलना सीखना (Learning to walk)।
II. ठोस पदार्थ खाना सीखना (Learning to take solid foods)।
III. बोलना सीखना (Learning to talk)
IV. शरीर के त्याज्य पदार्थों को रोकने पर नियन्त्रण सीखना (Learning to control the elimination of body wastes) |
IV. लिंग भिन्नता व लैंगिक विनम्रता सीखना (Learning sex differences and sexual modesty)
VI. सामाजिक व शारीरिक वास्तविकताओं को वर्णित करने के प्रत्यय और भाषा अर्जित करना (Acquiring concepts and language to describe social and physical reality) I
VII. पढ़ने के लिए तैयार रहना (Readiness for reading)।
VIII. सही व गलत में अन्तर करना सीखना तथा चेतना का विकास (Learning to distinguish right from wrong developing a conscience) 


मध्य बाल्यावस्था (6 से 12 वर्ष तक) के विकासात्मक कार्य


I.सामान्य खेलों के लिए आवश्यक शारीरिक कौशल सीखना (Learning physical skills necessary for ordinary games) I
Self) ।
II. स्वयं के प्रति हितकर प्रवृत्ति का निर्माण (Building a wholesome attitude towards one-
III. हमउम्र साथियों के साथ रहना सीखना (Learning to get along with age-mates) |
IV.लिंग के अनुरूप उचित भूमिका सीखना (Learning an appropriate sex role) |
V. पढ़ने, लिखने तथा गणना करने के मूलभूत कौशलों का विकास (Developing fundamental skills in reading, writing and calculating) |

VI.नित्यप्रति जीवन के लिए आवश्यक अवधारणाओं का विकास (Developing concepts necessary for everyday living) |

VII.चेतना, नैतिकता और मूल्यों के एक स्तर का विकास

VIII.व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का अर्जन (Achieving personal independence)
IX.समाज के प्रति मान्य प्रवृत्तियों का विकास (Developing acceptable attitudes toward society)


किशोरावस्था (13 से 18 वर्ष तक) के विकासात्मक कार्य


I. दोनों लिंगों के साथ परिपक्व सम्बन्धों का अर्जन (Achieving mature relations with both sexes)।
II. पुरुष या महिला की सामाजिक भूमिका सीखना (Achieving a masculine of feminine social role)।
III. अपने शारीरिक गठन को स्वीकार करना (Accepting one’s physique)।
IV. प्रौढ़ संवेगात्मक स्वतन्त्रता अर्जित करना (Achieving emotional independence of adults) ।
V. विवाह एवं पारिवारिक जीवन की तैयारी करना (Preparing for marriage and family life)।
VI. आजीविका की तैयारी (Preparing for economic career)।
VII. मूल्यों तथा अपने व्यवहार को निर्देशित करने के लिए एक नैतिक प्रणाली का अर्जन (Acquiring values and an ethical system to guide behaviour) |
VIII. सामाजिक रूप से उत्तरदायी व्यवहार की इच्छा करना तथा अर्जन करना (Desiring and achieving socially responsible behaviour) |

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