रंगों का त्योहार: भारत में होली 2024 की तिथि और उत्सव का सार

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रंगों का त्योहार होली
रंगों का त्योहार होली 2024

होली 2024 की रंगारंग कहानी भारत में 

भारत के हृदय में, रंगों का त्योहार, होली, वसंत के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। हर साल, यह खुशियों और हंसी से भरा दिन लाखों लोगों को एक साथ लाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली 2024 में कब है और इस उत्सव के पीछे की कहानियां क्या हैं? चलिए, गहराई से गोता लगाते हैं और रंगों के इस जादुई सफर का आनंद लेते हैं:

होली 2024 : खुशियों की तारीख

इस साल, होली बुधवार, 10 मार्च 2024 को मनाई जाएगी। होली से एक दिन पहले, जिसे होलिका दहन कहा जाता है, लोग लकड़ी का ढेर जलाते हैं और बुराई को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। रंगों की होली अगले दिन मनाई जाती है, जहां लोग एक-दूसरे पर रंग, पानी और गुब्बारों की बौछार करते हैं, भेदभाव भुलाकर भाईचारे और खुशियों का संदेश फैलाते हैं।

होली के पीछे की कहानियां: मिथकों का संगम

होली के कई रूप हैं, और इसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां हैं। सबसे प्रसिद्ध कहानी राजा हिरण्यकश्यप और उनके बेटे, प्रह्लाद से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप को खुद को भगवान मानने का भ्रम था, लेकिन उसका बेटा, प्रह्लाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आग में लेने का आदेश दिया, जिसमें प्रह्लाद को बैठाया गया था। लेकिन होलिका को भस्म कर दिया गया, जबकि प्रह्लाद विष्णु की कृपा से सुरक्षित रहा। प्रह्लाद की जीत को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

एक अन्य पौराणिक कथा कृष्ण और राधा की प्रेम कहानी से जुड़ी है। मान्यता है कि राधा का रंग गोरा था, जबकि कृष्ण का सांवला। राधा को यह डर था कि कृष्ण उनसे कम प्यार करते हैं, लेकिन कृष्ण ने उन्हें मजाक में अपने ऊपर रंग डालने के लिए कहा। यही से रंगों से खेलने की परंपरा शुरू हुई।

होली  का जश्न: परंपराएं और खुशियां

होली का जश्न भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कुछ स्थानों में होली से पहले पूजा-पाठ होते हैं, लोग होलिका दहन की आग में नारियल फेंकते हैं और बुरी आत्माओं को दूर करने की कामना करते हैं। रंगों की होली के दिन सुबह से ही धूम मच जाती है। बच्चे, युवा और बड़े-बूढ़े सभी विभिन्न रंगों से सराबोर होकर एक-दूसरे को रंगते हैं। हंसी, ठहाके और मस्ती हर किसी के चेहरे पर झलकती है। पानी के गुब्बारों की लड़ाई और पारंपरिक गीत-संगीत इस उत्सव का रोमांच बढ़ाते हैं।

होली सिर्फ रंगों का ही त्योहार नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन अमीर और गरीब, ऊंचे और नीचे, सभी भेदभाव भुलाकर एक साथ रंग खेलते हैं। ये त्योहार लोगों को करीब लाता है, दुश्मनी मिटाता है और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

होली से जुड़े स्वादिष्ट व्यंजन

होली के जश्न में स्वादिष्ट व्यंजनों का भी अपना एक अलग ही महत्व है। गुजिया, मठरी, मालपुआ, ठंडाई जैसे व्यंजन हर घर में तैयार किए जाते हैं। ये मीठे और नमकीन व्यंजन त्योहार के माहौल को और भी खुशनुमा बना देते हैं।

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